National Income PDF In Hindi | Kalam Academy 2nd Grade Notes PDF

National Income PDF In Hindi | Kalam Academy 2nd Grade Notes PDF

राष्ट्रीय आय की परिभाषा (indian national income)

National Income PDF In Hindi : निश्चित समयावधि / वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान देश के निवासियों के द्वारा सम्पूर्ण विश्व में उत्पादित अंतिम उत्पादों का शुद्ध मौद्रिक मूल्य ही उस देश की राष्ट्रीय आय है। (NNPfc= राष्ट्रीय आय ) =

राष्ट्रीय आय की विशेषताएं :

  1. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय की गणना दादा भाई नौरोजी के द्वारा 1868-69 में की गई थी। जिनके अनुसार उस समय भारत की प्रतिव्यक्ति आय 20₹ वार्षिक थी

Book :- Poverty & Un-British Rule in India = इस पुस्तक में उनके द्वारा धन निष्कासन निकासी” का सिद्धांत बताया गया ( इनकी गणना में वैज्ञानिक विधि का अभाव था )

  1. वैज्ञानिक विधि से भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय का मापन डॉ V. K.R.V. राव द्वारा 1931-32 में किया गया। जिनके अनुसार उस समय भारत की प्रतिव्यक्ति आय = 627 वार्षिक थी ( डॉ विजेंद्र कस्तुरीरंगन वर्धराजा राव )
  2. स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व निम्नलिखित व्यक्तियों के द्वारा भारत में राष्ट्रीय आय का मापन किया गया –
    1. दादा भाई नौरोजी 1968-69 
    2. शाह एवं खम्बाटा
    3. बेरिंग
    4. लार्ड कर्जन
    5. आर सी देसाई
    6. वी के आर वी राव -1931-32
    7. फिण्डले शिराज
    8. विलियम डिग्बी
  3. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात राष्ट्रीय आय का मापन करने के लिए P. C. महालनोबिस की अध्यक्षता में ” “राष्ट्रीय आम समिति” का गठन किया गया था। (4 अग 1949)
  4. इस समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रीय आय की गणना हेतु 2 मई, 1951 को “केन्द्रीय सांख्यिकीय कार्यालय “(CSO) की स्थापना की गई। जिसने वर्ष 1956 के बाद से भारत में राष्ट्रीय आय की गणना प्रारम्भ की।
  5. CSO को राष्ट्रीय आय की गणना के आँकड़े – “राष्ट्रीय नमुना एवं प्रतिदर्श कार्यालय ” (NSSO) के द्वारा उपलवध करवाये जाते है। 
    1. CSO का प्रधान कार्यालय = नई दिल्ली में (1951) 
    2. Nsso का प्रधान कार्यालय = कोलकाता में (1950)
  6. 23 मई, 2019 को CSO एवं NSSO को एकीकृत करते हुये “राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ” (NSO) – नई दिल्ली की की स्थापना की जा चुकी है (वर्तमान में NSO ही राष्ट्रीय आय का मापन करता है)
  7. भारत ने राष्ट्रीय आय की गणना के लिए सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित क्षेत्रों में बांटा जाता है
    1. प्राथमिक क्षेत्र :- कृषि एवं सहायक क्रियाऐं । [पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन एवं खनन etc]
    2. द्वितीयक क्षेत्र :- विनिर्माण एवं औद्योगिक क्षेत्र
    3. तृतीयक क्षेत्र :- सेवाऐं – (परिवहन, ऊर्जा, संचार, बीमा, बैकिंग)
  8. भारत के उत्पादन में सर्वाधिक योगदान = सेवा क्षेत्र का (तृतीयक क्षेत्रो)
  9. रोजगार में सर्वाधिक योगदान = प्राथमिक क्षेत्र 

राष्ट्रीय आय के मापन की विधियाँ:

     1 . उत्पादन / उत्पाद विधि :⇒ इस विधि के अनुसार वित्तीय वर्ष में देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का शुद्ध मूल्य का योग राष्ट्रीय आय होती है।

  1. आय विधि :⇒ इस विधि के अनुसार वित्तीय वर्ष में नागरिकों को उत्पादन के साधनों से प्राप्त कुल आय ही राष्ट्रीय आय होती है।
राष्ट्रीय आय= लगान + मजदुरी / वेतन + ब्याज + लाभ
  1. व्यय विधि :⇒ उस विधि के अनुसार वित्तीय वर्ष में नागरिकों के द्वारा किये गये कुल व्यय व बचत का योग  ही राष्ट्रीय आय है। 
      राष्ट्रीय आय  = C+I+G+ (X-M)
  • C = Consumption (उपभोग)
  • X = Export (निर्यात)
  • I = Investment (निवेश)
  • M : Import (आयात)
  • CG = Govt. Expenditures (सरकारी आय)

Note :- भारत में राष्ट्रीय आय की गणना हेतु राय विधि का प्रयोग नहीं किया जाता है। क्योंकि भारत में बचत के आँकड़े एकत्र करना कठिन कार्य है।

हरित राष्ट्रीय आय (Green National Income)

⇒ यह पर्यावरण एवं संधारणीय विकास से सम्बंधित अवधारणा है जो उत्पादन के लिए पर्यावरण को किये गये नुकसान को कम करने पर जोर देती है। 

हरित राष्ट्रीय आय = राष्ट्रीय आय – पर्यावरण का क्षय

 

हरित राष्ट्रीय आय में शामिल किये जाने वाले एवं शामिल नहीं किये जाने वाले व्यवहार :-

शामिल किया जाता है शामिल नहीं किया जाता है
  1. मध्यवर्ती वस्तुऐं / सेवायें अशदान 
  2. अवैधानिक आय
  3. आकस्मिक आय 
  4. जेब खर्च की बचत
  5. घरेलू कार्य
  6. पिछले वर्ष का स्टॉक
  7. हस्तांतरण भुगतान
  8. संपतियों के विक्रम से प्राप्त लाभ
  9. सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश 
  10. घरेलू बगीचे में किया गया उत्पादन
  11. भविष्य निधि में कर्मचारी का अंशदान
  1. भविष्य निधि में नियोक्ता का
  2. अंतिम वस्तुऐं एवं सेवाऐं
  3. कम्पनी के द्वारा अशधारियो को दिया गया लाभांश (प्रतियोगिता का ईनाम, लॉटरी)
  4. सरकार के द्वारा नागरिकों को दी गई नि: शुल्क सेवाऐं ।
  5. किसान के द्वारा स्वयं के परिवार के उपयोग के लिए किया गया उत्पादन (वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति)
  6. विदेशीयों के द्वारा भारत में किया गया खर्च। 
  7. सांसदों / विधायकों को दिया गया भत्ता 

 

राष्ट्रीय आय से सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएं :-National Income PDF In Hindi

  1. प्रति व्यक्ति आय :- (PCI)

प्रति व्यक्ति आय =राष्ट्रीय आय जनसंख्या

Note:- किसी देश की प्रति व्यक्ति आय में सतत् वृद्धि उस देश की आर्थिक संवृद्धि का सबसे उपयुक्त मापन का आधार होता है।

  1. व्यक्तिक आय :- (Personal Income) – प्रति व्यक्ति आय की अवधारणा, यह स्पष्ट नहीं करती है कि लोगों के हाथों प्राप्त हो रही है। में वास्तव में कितनी आय

⇒यह बात करने के लिए मौलिक आय की गणना की जाती है।।

सूत्र- वैयक्तिक आय = राष्ट्रीय आय- निगम कर – अवितरित लाभांश – सामान्य अशंदान + सब्सिडी + व्यापारिक हस्तांतरण
  1. खर्च करने योग्य आय : Disposable Income 
Dis. Income = वैयक्तिक आय – व्यक्तिगत प्रत्यक्ष कर
    1. क्रय शक्ति समता :- Purchasing Power Parity (PPP)
    • इससे अभिप्राय उस अवधारणा से है जिससे किसी एक वस्तु को क्रम करने के लिए घरेलू मुद्रा के खर्च की तुलना उसी वस्तु को अन्तर-राष्ट्रीय मुद्रा (डॉलर) में क्रम करने पर किये गए खर्च से की जाती है। अर्थात् किसी एक वस्तु को कम करने मैं रुपये में होने वाले खर्च की तुलना उसी वस्तु को डॉलर में क्रम करने पर किये गये खर्च से करना ।

Ex –  A पेन = 1 डॉलर

    •        इसी पेन की कीमत भारत में 10₹
    •        1 USD की क्रम शक्ति भारतीय 10₹ के बराबर है। 

Note : क्रय शक्ति समता के आधार पर भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था है 

    1. चीन
    2. अमेरिका 
    3. भारत

# राष्ट्रीय आय को मापने में आने वाली कठिनाइयों

    1. दोहरी गणना की समस्या
    2. असंगठित क्षेत्र की आय का आंकलन कठिन ।
    3. आँकड़ों की अपर्याप्ता ।
    4. प्रशासनिक इच्छा शक्ति का अभाव | 
    5. लोगों में जागरूकता का अभाव ।
    6. काले धन की समस्या ।
    7. मानव संसाधन का अभाव ।

अर्थव्यवस्था का मापन (National Income PDF In Hindi)

(आधार-2)

आर्थिक संवृद्धि 

(Eco. Growth)

आर्थिक विकास 

(Eco. Development)

निश्चित समयावधि में अर्थव्यवस्था में उत्पादन / आम में मात्रात्मक परिवर्तन निश्चित समयावधि में अर्थव्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन

 

आर्थिक संवृद्धि को मापने के 4 आधार 

सकल घरेलू उत्पाद 

(GDP)

सकल राष्ट्रीय उत्पाद 

(GNP)

शुद्ध घरेलू उत्पाद 

(NDP)

शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP)

राष्ट्रीय आय

Note :- उत्पादन की प्रक्रिया का अंतिम परिणाम उत्पाद कहलाता है। 

जैसे:- कृषि नामक उत्पादन प्रक्रिया का अंतिम परिणाम अनाज उत्पाद है.

 उत्पाद के 2 प्रकार

मूर्त उत्पाद

⇩ 

वस्तुऐं

अमूर्त उत्पाद 

सेवाऐं

सकल घरेलू उत्पाद (National Income PDF In Hindi)

Q. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से क्या अभिप्राय है ?

ANS- सकल घरेलू उत्पाद:- GDP = Gross Domestic Productअर्थ :– निश्चित समयावधी में किसी देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं एवं अन्तिम सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग ही उस देश की GDP है।

सकल घरेलू उत्पाद GDP से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य :

  1. GDP की गणना वितिय वर्ष की अवधी के दौरान की जाती है भारत के वितिय वर्ष की अवधी = 1 अप्रेल से 31 मार्च । (प्रस्तावित वितिय वर्ष 1 जनवरी – 31 दिसम्बर )
  2. मध्यप्रदेश भारत का वह प्रथम राज्य है जिसने स्वयं की आर्थिक गणना का वितिय वर्ष बदलकर 1 जनवरी से 31 दिसम्बर कर दिया । (2015-16 मे)
  3. GDP की गणना में केवल अंतिम वस्तुओं एवम् सेवाओं को ही शामिल किया जाता है ना कि मध्यवृति उत्पादों को ।
  4. अंतिम उत्पाद तात्पर्य उन उत्पादों से है जो अंतिम उपभोग के लिए बाजार में उपलब्ध है ऐसा दोहरी गणना से बचने के लिए किया जाता है।
  5. GDP की अवधारणा घरेलू सीमा पर आधारित अवधारणा है ना की निवासी आधारित अवधारणा, अर्थात भारत की GDP की गणना में भारत में उत्पादन को शामिल किया जायेगा। भले ही ऐसा उत्पाद भारतीयों ने किया हो या विदेशीयों ने ।
  6. यदि किसी अवधि में किसी देश की GDP में वृद्धि होती है तो इसका अर्थ है कि उस देश की आन्तरिक शक्ति में वृद्धि हुई है।
  7. GDP में परिवर्तन की गणना करने के लिए GDP का आंकलन दो वर्ष की कीमतों पर किया जाता है –
    • चालू वर्ष की कीमतों पर (Current rate) = मौद्रिक / प्रचलित कीमतों पर GDP (Nominal (GDP) 
    • आधार वर्ष की कीमतो पर = वास्तविक GDP (Real GDP)

Note: GDP की गणना के लिए भारत का आधार वर्ष 2011-12 है

GDP की गणना में प्रमुख लागतें / मूल्य 

  1. साधन / कारक लागत:- factor cast
साधन / कारक लागत = लगान + मजदुरी + ब्याज + लागत 
  • सामान्य शब्दों में किसी उत्पाद को बनाने में होने वाला कुल खर्च ही उत्पाद की साधन लागत होती है।
  • आर्थिक सन्दर्भ में उत्पाद बनाने के लिए उत्पत्ति के साधनों पर होने वाला कुल खर्च ही उत्पाद की साधन/ कारक लागत है।
उत्पत्ति के साधन खर्च
भूमि

श्रम 

पूँजी

जोखिम / उद्यमिता

लगान / किराया (Rent)

मजदूरी (Wages)

ब्याज (Interest)

लाभ (Profit)

 

  1. बाजार लागत :- Market 
  • उत्पाद की कारक लागत में शुद्ध अप्रत्यक्ष कर जोड़ने पर जो लागत प्राप्त होती है उसे उत्पाद की बाजार लागत कहते है।
बाजार लागत साधन लागत / + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर कारक लागत

Note : (i) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर सब्सिडी

बाजार लागत = साहान लागत + अप्रत्यक्ष कर – सब्सिडी

Note :- उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के द्वारा दी गई आर्थिक सहायता को सब्सिडी कहते है।

कर के प्रकार : – 2 प्रकार

प्रत्यक्ष कर Direct Tax अप्रत्यक्ष/परोक्ष कर Indirect Tax
  1. वे कर जो आम / लाभ। सम्पति पर लगे।
  2. कर चुकाने का दायित्व एवं कर चुकाने का भार (कराघात, करापात) समान व्यक्ति पर हो. –उदा. – आय कर
  1. वे कर जो उत्पादन, क्रय-विक्रय मा आयात-निर्यात पर लगाया जाता है।
  2. कर चुकाने का दायित्व एवं कर चुकाने का भार अलग -2 व्यक्तियों पर हो। 

उदा. – GST Goods & Service Tax = (वस्तु एवं सेवा कर)

 

C . बाजार मूल्य :- Market price

  • बाजार लागत भें लाभ की राशि जोड़ने पर उत्पाद का बाजार मूल्य प्राप्त होता है।
 बाजार मूल्य = बाजार लागत + लाभ की राशि

 

# सकल राष्ट्रीय उत्पाद : GNP= Gross National Product

अर्थ :-  निश्चित समयावधी में देश के निवासियों के द्वारा सम्पूर्ण विश्व में (देश में/ देश के बाहर ) उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मौद्रिक मूल्य उस देश की GNP है।

  • GDP =सीमा आधारित अवधारणा
  • GNP = निवासी आधारित अवधारणा

भारत की GNP

भारत में भारतीयों का उत्पादन

GDP – विदेशीयो का उत्पादन आयात (import)

भारत के बाहर भारतीयों का उत्पादन 

निर्यात(Export)

 

GNP की गणना 

GNP = GDP + NFIA                                              NFIA= Net factor Income from Abroad 

                                                                                               (विदेश से प्राप्त शुद्ध साधन आय)

 

NFIA = (X-M)                X = Export 

                                      M = Import

GNP = GDP + (X-M)

 

स्थितियाँ :-

  1. GDP > GNP = आयात > निर्यात
  2. GNP > GDP = निर्यात > आयात
  3. GDP = GNP = ना तो आयात, ना ही निर्यात (बंद अर्थव्यवस्था) 

GDP=GNP होने पर स्थिति होगी ?

Note :- 

  1. भारत की स्थिति = GDP > GNP 

                         आयात >निर्यात

  1. यदि किसी देश की GNP में वृद्धि हो रही हो तो इसका अभिप्राय हैं कि उस देश की बाह्य शक्ति में वृद्धि हो रही है। (निर्यात बढ़ रहे हैं)

# शुद्ध घरेलू उत्पाद :- NDP (Net Domestic Product)

अर्थ :- किसी देश की GDP में से मूल्य ह्रास (Deprecialis की राशि को घटाने के पश्चात NDP प्राप्त होती है ।

★ Note :- उत्पादन में प्रयुक्त भौतिक मशीनों के मूल्य में आने वाली कभी / गिरावट को मूल्य ह्रास कहते है । 

  NDP = GDP- मूल्य ह्रास

 

⇒ GDP Fc – मूल्य हास = NDPFC ⇒ Factor Cast
⇒ GDP MC – मूल्य हास = NDPMC ⇒ Market cast
⇒ GDPMP – मूल्य ह्रास = NDPMI => Market Price

 

# शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद :- NNP (Net National Product) 

अर्थ :- किसी देश की ONP में से मूल्य ह्रास घटाने पर NNP जात होती है। अर्थात् =   NNP = GNP – मूल्य हास

⇒  CON PEC – मूल्य हास = NNPc राष्ट्रीय आय
⇒  GNPMC – मूल्य हास = NNPmc
⇒  GNPr मूल्य ह्रास = NNPM

National Income PDF In Hindi

 

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